कन्हैयालाल के हत्यारे NIA अफसरों से फांसी पर करते हैं यह सवाल, अपनी मौत का डर?

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 नई दिल्ली
 
उदयपुर में कन्हैयालाल का गला रेतने वालों इस्लामिक कट्टरपंथियों से एनआईए अधिकारी जहां पूछताछ में जुटे हैं और उनसे हत्याकांड से जुड़े राज उगलवा रहे हैं तो वहीं रियाज और गौस का उनका एक ही सवाल होता है- हमारी गुनाह के लिए कोर्ट हमें फांसी की सजा देगा या उम्रकैद होगी? 28 जून को रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ने आईएआईएस आतंकवादियों की तरह कन्हैयालाल का गला रेत दिया था। पैगंबर मोहम्मद को लेकर नूपुर शर्मा की टिप्पणी पर एक पोस्ट की वजह से कन्हैया की क्रूरता से हत्या की गई।

आंतरिक सुरक्षा एजेंसियां हत्यारों और उनके साथियों की कट्टरता के स्तर को देखकर हैरान हैं, क्योंकि उन्हें अपनी बर्बरता पर कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, सजा को लेकर चिंतित जरूर हैं। कन्हैया का गला रेतने वाले हत्यारे और उनके साथी इस समय एनआईए की हिरासत में हैं। जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, कन्हैया का गला रेते जाने से एक सप्ताह पहले इसका फैसला लिया गया था। रियाज और अत्तारी ने इस काम को अपने हाथ में लेने की पहल की थी। कसाइखानों में काम आने वाले खंजर जैसे हथियार से उन्होंने कन्हैया का गला रेता जिसे वेल्डर रियाज अत्तारी ने तैयार किया था। रियाज और गौस सूफी बरेलवी मुसलमान हैं और अजमेर जाते समय उन्हें रास्ते में गिरफ्तार किया गया था। दोनों अजमेर शरीफ दरगाह पर जाकर कन्हैया की हत्या पर नया वीडियो बनाने वाले थे।

इस बीच, अमरावती में उमेश कोल्हे के हत्यारों को एनआईए के हवाले किया जाएगा। नूपुर शर्मा के समर्थन को लेकर महाराष्ट्र में हुई इस हत्याकांड को लेकर डीजी (एनआईए) दिनाकर गुप्ता ने महाराष्ट्र के डीजीपी रजनीश सेठ से कस्टडी ट्रांसफर को लेकर बात की है। भले ही अमरावती के पुलिस कमिश्नर ने दावा किया है कि कोल्हे की हत्या को लूट के रूप में केस की संवेदनशीलता की वजह से दिखाया गया था, लेकिन सच यह है कि वारदात के दो दिन के भीतर दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस को मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में एक सप्ताह का समय लग गया।

दोनों घटनाओं की जांच जारी है और अब तक की तहकीकात में प्रतिबंधित इस्लामकि संगठनों की भूमिका सामने आ रही है। एक सप्ताह के भीतर गला रेतने की दोनों वारदातें पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे कट्टरपंथी संगठन के प्रोत्साहन से भारत में बढ़ते धार्मिक कट्टरता की ओर इशारा करता है। आतंकरोधी अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, ”धार्मिक चरमपंथ पाकिस्तान में एक उद्योग है और ये संगठन पूरे उपमहाद्वीप को रूढ़ीवादी इस्लाम के नाम पर कट्टरता फैला रहे हैं और कानून के लिए चुनौती बन रहे हैं।” अमरावती और उदयपुर की हत्या से देश में खतरे का स्तर ऊंचा है और नूपुर शर्मा के समर्थन के नाम पर और अधिक हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

 

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