बतौर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना का आज सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दिन, इन मामलों पर सुनाएंगे फैसला

Must Read


 नई दिल्ली।
 
भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में आज जस्टिस एनवी रमना का आखिरी दिन है। इस दिन को यादगार बनाने के लिए वह आज कई बड़े केस में फैसला सुनाने जा रहे हैं। गुरुवार देर रात सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अदालत की वाद सूची (Cause List) को अपडेट किया गाय। रात करीब साढ़े 11 बजे जारी की गई इस सूची में ऐसे पांच केस शामिल हैं, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया द्वारा फैसले सुनाए जाने हैं।

चुनाव में रेवड़ी कल्चर
सीजेआई एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव में किए गए मुफ्त वाले वादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। दिल्ली बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका ने देश में “रेवाड़ी कल्चर” पर एक बड़ी बहस शुरू कर दी है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा था कि अदालत को राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के दौरान इस तरह की घोषणा को लेकर विचार करना होगा। इस दौरान कोर्ट ने कल्याणकारी योजनाएं और मुफ्त के वादे के बीच का अंतर भी बताया था। आज इस केस में फैसले आने की उम्मीद है।

इस मामले पर आम आदमी पार्टी, वाईएसआरसीपी, कांग्रेस और डीएमके सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने सुझाव और राय प्रस्तुत किए हैं। अदालत ने शुरू में सरकारी प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, आरबीआई, नीति आयोग, वित्त आयोग और इससे जुड़े अन्य लोगों को लेकर एक समिति बनाने का सुझाव दिया था। बुधवार को हालांकि सीजेआई रमना ने यह कहा कि ऐसी समिति की अध्यक्षता कौन करेगा। चीफ जस्टिस ने यह भी सवाल किया था कि सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर विचार करने के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई है।

2007 गोरखपुर दंगों पर याचिका
गोरखपुर में हिंसा की कई घटनाओं को भड़काने के लिए कथित उग्र भाषण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से उत्तर प्रदेश की सरकार के इनकार कर दिया था। सरकार के इस फैसले को पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। वहां केस खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख कुया गया। इस मामले पर भी आज देश देश की सर्वोच्च अदालत फैसला सुनाने के लिए तैयार है।

यूपी के एक सामाजिक कार्यकर्ता परवेज परवाज द्वारा दायर याचिका में भड़काऊ भाषण देने के लिए योगी पर मुकदमा चलाने की मंजूरी से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। आरोप लगाया गया था कि 2007 में तत्कालीन लोकसभा सांसद योगी आदित्यनाथ ने मुहर्रम के दौरान गोरखपुर में एक कथित भड़काऊ भाषण दिया था, जिससे आपस में भिड़ंत हो गई थी। इसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुकदमा चलाने की मंजूरी से इनकार करने के यूपी सरकार के फैसले को बरकरार रखा था। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

कर्नाटक खनन मामला
एनजीओ समाज परिवर्तन समुदाय द्वारा 2009 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके कारण कर्नाटक में लौह अयस्क खदानों से खनन को बंद कर दिया गया था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी शर्तों के तहत कुछ खादानों को फिर से खोलने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, लौह अयस्क और छर्रों के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। अदालत में खनन कंपनियों द्वारा लौह अयस्क के निर्यात पर एक दशक पुराने प्रतिबंध को हटाने और कर्नाटक में लौह अयस्क के खनन पर जिला स्तर की सीमा को हटाने के लिए कई आवेदन दायर किए गए थे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

संकेत साहित्य समिति का स्थापना दिवस मनाया गया

रायपुरसंकेत साहित्य समिति का इकतालीसवाँ स्थापना दिवस बैस भवनमें रविशंकर विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. केशरी लाल वर्मा...

More Articles

Home
Install
E-Paper
Log-In